Cafe Reminiscence

तेरे ख़त

तेरे ख़त :राजेनà¥�दà¥�रनाथ ‘रहबर’/Jagjit Singh.

Café Reminiscence तेरी ख़à¥�शबू में बसे ख़त मै जलाता कैसे – राजेनà¥�दà¥�रनाथ ‘रहबर’ पà¥�यार की आख़री पूà¤�जी भी लà¥�टा आया हूà¤�अपनी हसà¥�ती को भी लगता है मिटा आया हूà¤�उमà¥�र भर की जो कमाई थी गà¤�वा आया हूà¤�तेरे ख़त आज मै…